प्रिज़्म की एक खोजी रिपोर्ट के अनुसार भारत के सबसे बड़े हिंदू दक्षिणपंथी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस साल की शुरुआत में अमेरिका में मोटी रकम चुकाकर लॉबिंग शुरू की।
प्रिज़्म पहला समाचार संस्थान है जिसने बताया कि अमेरिका की शीर्ष लॉबिंग फर्म में से एक स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स ने जनवरी में आरएसएस के लिए लॉबिस्ट के रूप में पंजीकरण कराया। 2025 की पहली तिमाहियों में स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स ने आरएसएस से अमेरिकी संसद, हाउस ऑफ रेप्रिज़ेन्टेटिव (जनप्रतिनिधि सदन) के अधिकारियों से लॉबिंग करने के लिए 330000 डॉलर प्राप्त किए। यह सार्वजनिक दस्तावेज़ों से पता चलता है।
सितंबर में आरएसएस ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे किए। संगठन की स्थापना, आलोचक और मानवाधिकार समूहों की भाषा में, हिंदू राष्ट्र के लिए हुई। इसके अनुयायियों पर मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यकों को भेदभाव, प्रताड़ना, हिंसा के जरिए निशाना बनाने के आरोप हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी आरएसएस से ही निकली है और मोदी खुद इसके कार्यकर्ता रहे हैं।
वाशिंगटन डीसी में आरएसएस के लॉबिंग प्रयास विदेशी प्रभाव गतिविधियों पर विशेषज्ञों के बीच सवालों को जन्म दे रहे हैं कि विदेशी इकाई के रूप में पहचान के बिना या स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स के फ़ॉरेन एजेंट्स रेजिस्ट्रेशन एक्ट (1938 का यह कानून जिसके तहत विदेशी हितों के प्रतिनिधियों को पंजीकरण करवाना आवश्यक है) के तहत पंजीकरण के बिना आरएसएस कैसे अपनी गतिविधियों को अंजाम दे पा रहा है। सार्वजनिक दस्तावेज़ पुष्टि करते हैं कि न तो स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स और न ही कोई दूसरी संस्था एफएआरए के तहत आरएसएस के एजेंट के तौर पर पंजीकृत है।
इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के एक दिन बाद, आरएसएस के एक प्रवक्ता ने प्रिज़्म की खोज के बारे में “एक्स” पर लिखा, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत में काम करता है और अमेरिका में किसी लॉबिंग फर्म के साथ इसका कोई संबंध नहीं है।”
स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स ने प्रिज़्म के टिप्पणी मांगने पर कोई प्रतिसाद नहीं दिया।
कागजों में – जो सरकार को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के लिए पारदर्शिता कानून लॉबिंग डिस्कलोजर एक्ट, 1995 (एलडीए) के तहत दाखिल किए गए थे) – आरएसएस को स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स के सीधे क्लाइंट के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है। बल्कि क्लाइंट स्टेट स्ट्रीट स्ट्रैटिजीस है, जो लॉबिंग फर्म वन+ स्ट्रैटिजीस के रूप में आरएसएस की ओर से काम कर रही है।
स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स के आरएसएस के लिए लॉबिंग पंजीकरण फॉर्म में सामान्य लॉबिंग मुद्दा विदेशी संबंध बताया गया है और खास लॉबिंग मुद्दा “अमेरिका भारत द्विपक्षीय संबंध” बताया गया है। विशेषज्ञों ने प्रिज़्म को बताया कि दो देशों के बीच संबंधों पर फोकस मजबूत संकेत देता है कि फर्म की गतिविधियां एफएआरए के तहत पंजीकृत होनी चाहिये।
अमेरिका में लॉबिंग और विदेशी प्रभाव पर विशेषज्ञ और किनसी इंस्टीट्यूट फॉर रेसपॉन्सिबल स्टेटक्राफ्ट में डेमोक्रेटाईज़िंग फ़ॉरेन पॉलिसी कार्यक्रम के निदेशक बेन फ्रीमैन कहते हैं, “एफएआरए के बजाय एलडीए के तहत पंजीकरण कराना इस प्रभाव अभियान को रहस्यमयी बनाता है। इस तरह, हमें इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता कि लॉबिस्ट आरएसएस के लिए क्या कर रहे हैं।”
एफएआरए का प्रशासन संभालने वाले न्याय विभाग के प्रवक्ता शेन्नॉन शेवलीन ने टिप्पणी करने से मना कर दिया।
भारत में, आरएसएस ने अपना प्रभाव आंशिक तौर पर स्थानीय समुदायों में चैरिटी कार्यक्रमों, स्कूलों और पर्यावरणीय आपदा राहत के जरिए बढ़ाया है। लेकिन अमेरिका में समूह, मोदी जिनकी हिंदू राष्ट्रवादी, मुस्लिम विरोधी राजनीति ने धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र को “चुनावी लोकतंत्र” में तब्दील कर दिया है, से संबंधों को लेकर हाल के वर्षों में राजनीतिक और मीडिया जांच का विषय बना हुआ है।
राजनीतिक अतिवाद पर शोध करने वाली डीसी स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट के संस्थापक और कार्यकारी निदेशक रकीब हमीद नाईक कहते हैं कि अमेरिका में आरएसएस की लॉबिंग गतिविधियां भारत के बाहर उसे कैसे देखा जाता है, इसे बदलने के अभियान का हिस्सा हो सकती हैं।
उन्होंने प्रिज़्म को बताया, “भारतीय राजनीति में भले आरएसएस मुख्यधारा की ताकत बन चुकी हो लेकिन वैश्विक स्तर पर उसे एक फासीवादी अर्धसैन्य समूह के रूप में देखा जाता है। इसलिए वह नीति निर्माताओं की धारणा बदलने में निवेश कर रहे हैं।”
आरएसएस लॉबिस्ट कौन हैं?
पिछली सदी में आरएसएस एक छोटे, हाशिये के स्वयंसेवी अर्धसैन्य समूह से भारत में सर्वाधिक प्रभावी दक्षिणपंथी हिंदू संगठन बन चुका है। केवल पुरुषों के संगठन के शुरुआती नेताओं ने नाजी जर्मनी और फासीवादी इटली की सराहना की थी और 1948 में आरएसएस के एक सदस्य ने महात्मा गांधी की हत्या की थी। आज, आरएसएस के सदस्य प्रशिक्षण शिविरों में अभ्यास और मार्च में हिस्सा लेते हैं और आलोचकों के अनुसार समूह के बड़े पैमाने पर लामबंदी व अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के तौर तरीकों की जड़ें इसके फासीवादी मूल में निहित हैं।
आरएसएस शिक्षा, समाज सेवा और श्रम के क्षेत्रों में हिंदू दक्षिणपंथी संगठनों के नेटवर्क संघ परिवार का वैचारिक शीर्ष है। 1947 में अंग्रेजी औपनिवेशिक शासन से भारत की आजादी के कुछ वर्षों बाद संघ ने राजनीतिक शाखा का गठन किया ताकि वह चुनावी राजनीति में प्रवेश कर सके। 1980 में उस राजनीतिक शाखा के सदस्यों ने भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की।
आलोचकों का आरोप है कि आरएसएस और भाजपा और उनसे सम्बद्ध संगठन मुस्लिमों, ईसाइयों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ प्रताड़ना और हिंसा को बढ़ावा देते हैं। उल्लेखनीय है कि, उन्हीं समूहों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद के स्थान पर हिंदू मंदिर बनाने के अभियान का नेतृत्व किया था, जिसकी परिणति 1992 में मस्जिद ध्वंस के रूप में हुई थी और भारतीय इतिहास में भयावह सांप्रदायिक दंगों की शृंखला भड़की थी। पिछले साल मोदी ने नए बने मंदिर के अभिषेक समारोह में हिस्सा लिया।
मोदी और भाजपा के 2014 में सत्ता में आने के बाद भारतीयों ने लोकतान्त्रिक ह्रास के अलावा अबाध अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति और नीतियों के मंज़र देखे हैं। आरएसएस भाजपा से गुथी हुई है। मोदी समेत पार्टी के कई शीर्ष नेता आरएसएस से आते हैं। अक्टूबर में आरएसएस के शताब्दी समारोह में मोदी ने कहा था, “उनका (आरएसएस का) एकमात्र हित राष्ट्र के प्रति प्रेम है।”
जहां अमेरिका के गैर लाभकारी संगठनों ने आरएसएस की विचारधारा का घरेलू स्तर पर हिंदू समुदायों में प्रसार किया है, अब आरएसएस ने अपना ध्यान सांसदों पर केंद्रित किया है।
तिमाही लॉबिंग रिपोर्ट के अनुसार स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स को 2025 की प्रथम तीन तिमाहियों में आरएसएस के लिए काम करने के लिए 330000 डॉलर मिले।
स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स के जो चार लॉबिस्ट इन रिपोर्ट में बताए गए हैं वह हैं ब्रैडफॉर्ड एलिसन, लुडमिला कसुलके, बिल शुस्टर और रैबेका सुनगला। एलिसन और कसुलके को कांग्रेस के साथ विदेशी सरकारों की तरफ से लॉबिंग का अनुभव है। एफएआरए फाइलिंग के अनुसार एलिसन अतीत में इथियोपिया और बेनिन का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और कसुलके दक्षिण कोरिया का और सीरियाई विपक्ष फर्म का भी प्रतिनिधित्व कर चुकी है। शुस्टर 2001 से 2019 तक पेंसिल्वानिया के एक रिपब्लिकन सांसद के लिए कार्य कर चुकी हैं, सुनगला उनके कार्यालय में स्टाफर थीं। बिल शुस्टर का भाई बाब वन+ स्ट्रैटिजीस के संस्थापकों में से एक है जो कि आरएसएस के लिए काम करने वाली फर्म के रूप में खुलासों में सूचीबद्ध है। न तो लॉबिस्ट और न ही वन+ स्ट्रैटिजीस ने टिप्पणी के अनुरोध का प्रतिसाद दिया।
प्रिज़्म द्वारा प्राप्त ईमेल और आरएसएस के एक प्रकाशन का एक लेख इस पर प्रकाश डालते हैं कि कैसे स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स और वन+ स्ट्रैटिजीस इस साल आरएसएस के साथ मिलकर कार्य कर रही हैं।
16 जनवरी को एलिसन ने हिंदू दक्षिणपंथ पर अनुसंधान करने वाली नेवार्क के रह्तगज़ यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और इतिहासकार आउद्रे ट्रस्कि से संपर्क किया। प्रिज़्म द्वारा प्राप्त एक ईमेल के अनुसार लॉबिस्ट की तरफ से संपर्क इस प्रयास के तहत किया गया कि आरएसएस पर अनुसंधान किया जाए।
एलिसन ने लिखा, “हमारी टीम हाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तरफ से रीटेन की गई है सांसदों को आरएसएस के मिशन और इसके प्रभाव के बारे में शिक्षित करने के लिए, चूंकि संस्था अपनी शताब्दी मना रही है। प्रयास आरएसएस के इतिहास और समूह से जुड़े ऐतिहासिक विवादों के बारे में एक समग्र समझ विकसित करने के लिए है। इसलिए, हम आपसे फरवरी में मिलना चाहेंगे आरएसएस के इतिहास और वर्तमान प्रभाव के बारे में आपकी धारणा समझने के लिए।”
ट्रस्कि का जवाब संक्षिप्त था, “संपर्क करने के लिए शुक्रिया। इस कार्य के लिए कृपया आप मुझे एफएआरए के तहत अपने दर्जे के बारे में बताएं।”
उन्होंने प्रिज़्म को बताया, “इसके बाद उन्होंने मुझ से कभी संपर्क नहीं किया।”
जून में शुस्टर बंधु और एलिसन नागपुर, भारत में आरएसएस के एक कार्यक्रम में मेहमानों में शामिल थे। न तो आरएसएस ने और न ही स्थानीय खबरों में बताया गया कि शुस्टर और एलिसन आरएसएस लॉबिस्ट हैं।
आरएसएस के एक प्रकाशन में एक लेख के अनुसार लॉबिस्ट संघ के एक प्रशिक्षण शिविर में गए और सदस्यों से मिले। लेख ने इस मुलाकात को “भारत-अमेरिका नागरिक समाज संबंधों में एक महत्वपूर्ण पल” करार दिया, जो इसका संकेत बताया गया कि अमरीकी नीति निर्माताओं की सरकार और कॉर्पोरेट कॉरिडर से परे जाकर भारत की स्वदेशी संस्थाओं में दिलचस्पी बढ़ रही है। लेख में चिन्हित किया गया कि यात्रा भारत और पाकिस्तान के बीच एक सैन्य संघर्ष के कुछ सप्ताह बाद हुई।
लेख के अनुसार इस “हाई प्रोफाइल अमरीकी प्रतिनिधि मण्डल” में वाल स्ट्रीट जर्नल के स्तंभकार वाल्टर रसल मीड और भारत अमेरिकी संबंधों पर थिंक टैंक विशेषज्ञ बिल ड्रेक्सेल भी थे। मीड और ड्रेक्सेल दोनों वाशिंगटन डीसी स्थित एक दक्षिणपंथी थिंक टैंक हडसन इंस्टिट्यूट में फ़ेलो हैं। मीड और ड्रेक्सेल ने प्रतिक्रिया मांगने पर प्रतिसाद नहीं दिया।
आरएसएस ने अपनी शताब्दी में समूह के प्रसार में मदद के लिए मैसाच्युसेट्स में बसे एक फार्मा इग्ज़ीक्यूटिव को भी सूचीबद्ध किया लगता है।
स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स, वन+ स्ट्रैटिजीस और आरएसएस के बीच लॉबिंग पंजीकरण विवेक शर्मा को “क्लाइंट के अलावा एक इकाई के रूप में सूचीबद्ध किया है जिसने तिमाही अवधि में लॉबिंग गतिविधियों के लिए 5000 डॉलर दिए हैं और वह लॉबिंग गतिविधियों में या हिस्सा लेता है या इनकी देखरेख करता है। शर्मा बोस्टन में एक दवा निर्माता कंपनी कोहेन्स लाइफसाइंसेज, जिसके भारत में भी ऑपरेशन्स हैं, का कार्यकारी प्रमुख है। शर्मा के लिए फॉर्म पर दिया पता उनकी एक कंपनी की वित्तीय फाइलिंग से मैच करता है। शर्मा अमेरिका में गैर लाभकारी संगठन एकल विद्यालय के संरक्षक के रूप में भी सूचीबद्ध हैं जो कथित रूप से आरएसएस से सम्बद्ध है और ग्रामीण भारत में स्कूलों का नेटवर्क चलता है। इन स्कूलों पर बच्चों को हिंदू श्रेष्ठता बोध का उपदेश देने वाली विभाजनकारी सीख दी जाती है। शर्मा ने प्रतिक्रिया मांगने पर कोई प्रतिसाद नहीं दिया।
अक्टूबर में द वाशिंगटन पोस्ट में एक स्तंभकार जिम जैरटी ने नागपुर में आरएसएस के शताब्दी में एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। जैरटी, जो एक कन्सर्वेटिव पत्रिका नेशनल रिव्यू के लिए राजनीतिक संवाददाता हैं, ने अपने स्तम्भ में लिखा, “मेरी यात्रा हडसन इंस्टिट्यूट और फाउंडेशन फॉर इंडिया एण्ड इंडियन डाइऐस्पर स्टडीस, जिसके अध्यक्ष आरएसएस से सम्बद्ध हैं, द्वारा प्रायोजित थी।
फाउंडेशन फॉर इंडिया एण्ड इंडियन डाइऐस्पर स्टडीस अमरीका स्थित गैर लाभकारी संगठन है जो इसकी वेबसाइट के अनुसार “भारत -अमरीका रिश्ते मजबूत करने के लिए” नियमित रूप से कार्यक्रमों की मेजबानी करता है। इनमें भारत के उच्चाधिकारी जैसे विदेश मंत्री, अमरीका में भारतीय महा वाणिज्यदूत शामिल होते हैं। एफआईआईडीएस “दोनों राष्ट्रों के बीच गहरे होते रणनीतिक और द्विपक्षीय संबंधों को रेखांकित करने के लिए” अमरीकी सांसदों को भी साथ लाती है। एफआईआईडीएस एफएआरए के तहत पंजीकृत नहीं है।
संगठन के अध्यक्ष खंडेराव कांड हिंदू स्वयंसेवक संघ, जो अमेरिका में आरएसएस की शाखा मानी जाती है, के सदस्य माने जाते हैं और कथित रूप से एचएसएस के राष्ट्रीय जन संपर्क समन्वयक के रूप में कार्य कर चुके हैं।
हडसन इंस्टिट्यूट, एफआईडीएस और कांड ने टिप्पणी के लिए अनुरोध करने पर प्रतिसाद नहीं दिया।
आरएसएस लॉबिंग प्रयासों ने कई विशेषज्ञों में चिंताएं पैदा की हैं कि क्या यह गतिविधियां एफएआरए के दायरे में आती हैं।
विदेशी लॉबिंग दर्जे को लेकर कानूनी सवाल
लॉबिंग खुलासों की समीक्षा के बाद अमेरिका में विदेशी प्रभाव पर तीन विशेषज्ञों ने प्रिज़्म को बताया कि लॉबिंग नियमों के अनुसार आरएसएस विदेशी संस्था मानी जाएगी और स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स को आरएसएस के लिए विदेशी एजेंट के रूप में पंजीकृत होना होगा।
एलडीए के तहत पंजीकरण फॉर्म में पूछा जाता है कि क्या कोई विदेशी इकाई ग्राहक में 20 फीसदी के बराबर स्वामित्व रखती है “प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, संपूर्णता से या इसके प्रमुख हिस्से में, गतिविधियों की योजना बनाने, देखरेख करने, नियंत्रण रखने, निर्देश देने, वित्तपोषण करने अथवा सब्सिडीकरण में।” स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स के पंजीकरण में “नहीं” के आगे बॉक्स पर टिक किया गया है यह इसके बावजूद कि आरएसएस ने अपने लिए वन+ स्ट्रैटिजीस की सेवाएं ली हैं जो कि एक सूचीबद्ध ग्राहक है।
किन्सी इंस्टिट्यूट के फ्रीमैन कहते हैं, “जहां तक एलडीए का सवाल है यह स्पष्ट रूप से, बिना किसी सवाल के, विदेशी इकाई है। उन्हें विदेशी इकाई बॉक्स में हाँ कहना चाहिए था। महत्वपूर्ण यह है कि वास्तव में ग्राहक कौन है और यहाँ वास्तविक ग्राहक, इस दस्तावेज़ के अनुसार, आरएसएस है, जो एक विदेशी इकाई है।”
स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स ने प्रिज़्म से पूछे गए इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि क्यों फर्म ने आरएसएस को विदेशी इकाई के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया है।
ओपन सीक्रेट्स में वरिष्ठ शोधकर्ता डैन ऑबले, जो वाचडॉग समूह के लॉबिंग डाटाबेस को देखते हैं, ने प्रिज़्म को बताया कि काँग्रेस प्रकाशी एलडीए के दिशानिर्देशों के अनुसार आरएसएस को खुद को विदेशी इकाई के रूप में बताना चाहिए। उन्होंने कहा, “निर्देश कानून को ही उद्धृत कर रही है।” ऑबले ओपन सीक्रेट्स के विदेशी लॉबिंग निगरानी कार्यक्रम को निर्देशित भी करते हैं।
दिशा निर्देशों में “लिस्टिंग फ़ॉरेन एंटिटीस” पर खंड में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि परोक्ष ग्राहक क्या होता है। दस्तावेज़ में समझाया गया है, “खुलासे का उद्देश्य उस विदेशी इकाई के हितों की पहचान करना है जो पंजीकरण वाले के पीछे रहकर कार्य कर रही हो।”
ऑबले ने प्रिज़्म से कहा, “यदि आरएसएस भारत से लॉबिंग प्रयास को फन्डिंग कर रही है या नियंत्रित कर रही है, या वह सम्बद्ध है और उसके सीधे हित हैं तो स्क्वाइर पाटॉनबॉग्स के विदेशी इकाई से संबंधों का खुलासा होना चाहिए।”
जब स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स ने आरएसएस के लिए एलडीए के तहत पंजीकरण करवाया, फर्म ने विदेशी रिश्तों को “सामान्य लॉबिंग मुद्दे” के लिए कोड डाला। “विशिष्ट लॉबिंग मुद्दे (मौजूदा और संभावित)” “अमेरिका-भारत द्विपक्षीय संबंध” है। बाद की तिमाही फाइलिंग में लेकिन विशिष्ट लॉबिंग मुद्दा है “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से अमरीकी अधिकारियों को परिचित करवाना।”
अमेरिकन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और “काँग्रेस एण्ड डायसपोरा पॉलिटिक्स: द इन्फ्लूअन्स ऑफ एथ्निक एण्ड फ़ॉरेन लॉबिंग” के सह संपादक जेम्स थर्बर ने कहा, “मेरा निष्कर्ष है कि ‘अमेरिका-भारत द्विपक्षीय संबंध’ एफएआरए में आते हैं। आरएसएस को एफएआरए के तहत पंजीकरण करवाना चाहिए था।”
फ्रीमैन ने भी सहमति जताते हुए कहा, “मेरे खयाल से पंजीकरण बयान में यह वाक्य महत्वपूर्ण है कि उनकी गतिविधियां अमरीका-भारत द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में हैं। मुझे नहीं लगता कि वह किसी छूट में आते हैं।”
एलडीए के तहत पंजीकृत कुछ फर्म एफएआरए छूट के लिए योग्य हो सकती हैं। लेकिन यदि कोई विदेशी सरकार या विदेशी राजनीतिक दल इसका प्रमुख लाभार्थी है तो यह छूट लागू नहीं होती। फ्रीमैन आगे कहते हैं कि क्योंकि खुलासों में “अमेरिका-भारत द्विपक्षीय संबंध” कहा गया है और आरएसएस का भारत में सत्तारूढ़ शासन से करीबी संबंध है तो यह महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि उन्हें अपने कार्य के लिए एलडीए के बजाय एफएआरए के तहत पंजीकृत होना चाहिए।
विशेषज्ञ कहते हैं कि लॉबिंग श्रेणियाँ महत्वपूर्ण हैं क्योंकि एफएआरए के तहत पंजीकरण करवाने वालों को ज्यादा खुलासे करने पड़ते हैं कि किन सांसदों से वह बात करते हैं और बैठकों, ईमेल, टेक्स्ट, प्राप्तियों, लेनदेन और वितरण का विवरण भी देना होता है। एलडीए के तहत आरएसएस के लॉबिस्ट को ऐसे विवरण देना जरूरी नहीं है।
सीनेट सचिव और हाउस ऑफ रेप्रिज़ेन्टेटिव्स के लिपिक, जो एलडीए प्रशासित करते हैं, ने टिप्पणी के लिए अनुरोध पर प्रतिसाद नहीं दिया।
यह पहली बार नहीं है कि किसी हिंदू राष्ट्रवादी संगठन की लॉबिंग गतिविधियों के फेडरल उल्लंघनों पर चिंताएं सामने आई हैं।
अमेरिका में लगभग 30 साल तक कार्य करने के बाद ओवरसीस फ़्रेंड्स ऑफ बीजेपी-यूएसए ने 2020 में एफएआरए के तहत भाजपा के विदेशी एजेंट के रूप में पंजीकरण करवाया था।
ओएफबीजेपी-यूएसए ने कथित रूप से भाजपा के लिए भारतीय चुनावों के दौरान समेत विभिन्न मौकों पर भाजपा के लिए प्रचार किया है। समूह ने भाजपा नेताओं की अमरीकी यात्राएं कारवाई हैं, उनके कार्यक्रमों की मेजबानी की है और सोशल मीडिया गतिविधियों के जरिए उनका प्रचार किया है।
अगस्त 2020 में एक भारतीय समाचार वेबसाईट ने बताया कि ओएफबीजेपी-यूएसए के एक सदस्य ने जो बाइडेन के राष्ट्रपति चुनाव अभियान और कमला हैरिस के उप राष्ट्रपति के रूप में चयन की आलोचना की थी। जब सदस्य के बयान ओएफबीजेपी-यूएसए का बयान मानकर इसके औचित्य पर सवाल उठाए गए तो संगठन ने स्पष्ट किया कि सदस्य के विचार संगठन के विचार नहीं हैं। इसके 10 दिन बाद समूह ने एफएआरए के तहत पंजीकरण करवाया।
भारत सरकार ने भी वाशिंगटन में लॉबिस्ट की सेवाएं ली हैं। लंबे समय से बीजीआर भारत का प्रतिनिधित्व करती रही है और इस साल इसने दो और लॉबिंग फर्म से संपर्क किया। अप्रैल में भारतीय दूतावास ने एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स के साथ 1.8 मिलियन डॉलर वार्षिक का करार किया। एफएआरए फाइलिंग के अनुसार फर्म की गतिविधियों में सरकारी रिश्ते और धारणा प्रबंधन शामिल है।
यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत के रूसी तेल खरीदने के कारण कथित जवाबी कार्रवाई के रूप में अगस्त में राष्ट्रपति ट्रम्प के भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के दस दिन के अंदर भारतीय दूतावास ने मर्करी पब्लिक अफेयर्स की सेवाएं लेना शुरू किया। एफएआरए फाइलिंग के अनुसार भारत सरकार मर्करी को 75000 डॉलर प्रति माह दे रही है। इसके बदले में प्राप्त सेवाओं में फेड्रल सरकारी रिश्ते, मीडिया रिश्ते और पेड विज्ञापन शामिल थे। भारत सरकार ने स्क्वाइर पाटॉन बॉग्स की आरएसएस की तरफ से “अमरीका-भारत द्विपक्षीय संबंधों” पर लॉबिंग के बारे में टिप्पणी के अनुरोध का प्रतिसाद नहीं दिया।
फरवरी में ट्रम्प प्रशासन ने एफएआरए को अटर्नी जनरल पैम बोनदी के जरिए मेमो भेजा जिसमें कानून के प्रवर्तन को कम किया गया और एफबीआई के फ़ॉरेन इन्फ्लूअन्स टास्क फोर्स को भंग कर दिया गया।
थर्बर कहते हैं, “इस समय समस्या यह है कि नए राष्ट्रपति के रूप में ट्रम्प ने स्पष्ट घोषणा की है कि वह एफएआरए सक्रिय रूप से लागू नहीं करने जा रहे।”
सेंटर फॉर स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज़्ड हेट के नाईक कहते हैं कि आरएसएस लॉबिस्ट के अमरीकी सांसदों के बीच समूह की छवि बदलने के प्रयासों के बावजूद प्रभाव अभियान को आरएसएस के बारे में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दशकों की जानकारी के कारण आसानी से चुनौती दी जा सकती है।
उन्होंने कहा, “उनकी सभी गतिविधियों के एक सदी के दस्तावेज़ किसी को भी उपलब्ध हैं।”
(मेघनाद बोस एवं बिपलब कुमार की रिपोर्ट प्रिज़म रिपोर्ट्स से साभार। अनुवाद : महेश राजपूत)